हर ब्रांड की अपनी एक कहानी होती है, और SayaCare की शुरुआत हुई धर्मशाला की शांत पहाड़ियों से।
साल 2019 की बात है। ध्रुव माथुर गुप्ता अपने एक दोस्त की मेडिकल शॉप पर काम कर रहे थे। वहीं उन्होंने एक ऐसी परेशानी देखी, जो रोज़ कई लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी थी।
दूर-दराज़ के गाँवों से लोग घंटों का सफर तय करके दवा लेने आते थे। कई लोगों को इसके लिए अपनी दिनभर की कमाई तक छोड़नी पड़ती थी। लेकिन मेडिकल स्टोर पहुँचने पर भी कई बार उन्हें ज़रूरी दवा नहीं मिलती थी।
यह बात ध्रुव को अंदर तक परेशान कर गई।
उन्होंने सोचा कि अगर लोग दवा लेने नहीं आ सकते, तो दवा ही उनके घर क्यों न पहुँचे? बस यहीं से उन्होंने लोगों के घर तक दवाइयाँ पहुँचाने की शुरुआत की। एक फोन कॉल पर ज़रूरी दवाइयाँ सीधे मरीज के दरवाज़े तक पहुँचने लगीं।
इसके लिए ध्रुव ने सप्लायर्स से दवाइयाँ मंगाने का एक छोटा-सा सिस्टम तैयार किया। वह खुद यह सुनिश्चित करते थे कि सही दवा सही व्यक्ति तक समय पर पहुँचे। धीरे-धीरे धर्मशाला के कई लोगों की ज़िंदगी पहले से कहीं आसान हो गई।
लेकिन फिर एक दिन सब कुछ बदल गया।
एक ग्राहक ने शिकायत की कि दवा असर नहीं कर रही है।
ध्रुव चाहते तो इसे एक सामान्य शिकायत समझकर नज़रअंदाज़ कर सकते थे। लेकिन जल्द ही ऐसी कई और शिकायतें आने लगीं। लगभग हर शिकायत में एक ही बात सामने आ रही थी, दवाइयाँ उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रही थीं।
यहीं से ध्रुव ने इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करने का फैसला किया।
ध्रुव और डॉ. शिवांगी ने मिलकर भारत में दवाइयों से जुड़े नियमों और पूरी सप्लाई चेन को समझना शुरू किया। उनकी जांच में कई ऐसी कमियाँ सामने आईं, जो दवा बनने से लेकर मरीज तक पहुँचने के पूरे सफर में मौजूद थीं।
और यही वह मोड़ था, जहाँ से SayaCare की असली कहानी शुरू होती है…
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भारत में दवाइयों से जुड़ी बड़ी समस्याएँ
ध्रुव और डॉ. शिवांगी ने जब इस पूरे सिस्टम को समझना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि समस्या सिर्फ एक-दो जगह नहीं थी। दवा बनने से लेकर मरीज तक पहुँचने के पूरे सफर में कई ऐसी कमियाँ थीं, जिनका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है।
1. दवाइयों की गुणवत्ता
जांच के दौरान ध्रुव ने दिनेश ठाकुर की किताब “Truth Pill” पढ़ी। इस किताब में 2019 में जम्मू-कश्मीर में हुई कफ सिरप त्रासदी का ज़िक्र है। इस घटना ने ध्रुव और डॉ. शिवांगी दोनों को झकझोर दिया, खासकर इसलिए क्योंकि उनके अपने ग्राहकों से भी दवाइयों के असर न करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
साल 2025 में Authentication Solution Providers (ASPA) की एक स्टडी में सामने आया कि भारत के दवा बाजार का लगभग 28% हिस्सा नकली दवाइयों का है। यानी अगर कोई व्यक्ति ठीक होने की उम्मीद में दवा ले रहा है, तो लगभग हर तीन में से एक मामले में यह संभावना है कि वह दवा सही तरह से काम ही न करे। ऐसे में मरीज को यह भी पता नहीं चलता कि समस्या दवा में है, और वह बस ठीक होने का इंतज़ार करता रहता है।
2. लंबी सप्लाई चेन
दवा आपके हाथों तक पहुँचने से पहले कई लोगों और कई जगहों से होकर गुजरती है। इस पूरी प्रक्रिया में हर स्तर पर लागत बढ़ती जाती है, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहक पर ही आता है।
लेकिन बात सिर्फ कीमत की नहीं है। बार-बार अलग-अलग जगहों पर रखने और तापमान बदलने की वजह से दवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। भारत में कई गोदामों में सही तापमान और स्वच्छता की व्यवस्था नहीं होती, जिससे दवा के सक्रिय तत्व (Active Ingredients) कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
3. दवाइयों की बढ़ती कीमत
जन औषधि केंद्रों और सरकारी अस्पतालों को छोड़ दें, तो भारत में दवाइयाँ अक्सर महंगी मिलती हैं।
असल में मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली कई दवाइयाँ वही जेनेरिक दवाइयाँ होती हैं, जिन्हें अलग-अलग ब्रांड अपने नाम से बेचते हैं। बड़ी फार्मा कंपनियाँ ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भारी खर्च करती हैं, और यह पूरा खर्च आखिरकार ग्राहक से ही वसूला जाता है।
4. दवाइयों का सही तरीके से स्टोर न होना
दवाइयाँ तापमान, नमी और रोशनी के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। अगर उन्हें सही परिस्थितियों में स्टोर न किया जाए, तो मरीज तक पहुँचने से पहले ही उनकी गुणवत्ता कम हो सकती है। दुर्भाग्य से कई जगहों पर दवाइयों का भंडारण तय मानकों के अनुसार नहीं किया जाता।
5. विकल्प की जानकारी का अभाव
जब डॉक्टर किसी खास ब्रांड की दवा लिखते हैं, तो मरीज अक्सर उसी ब्रांड को ढूंढ़ता है। अगर वह दवा नहीं मिलती, तो उसे लगता है कि अब कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
जबकि सच यह है कि उसी दवा के समान कंपोजिशन वाली दूसरी दवाइयाँ किसी और नाम से उपलब्ध हो सकती हैं। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाइयों का सबसे बड़ा सप्लायर है और वैश्विक सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा भारत से आता है। यानी विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं है।
6. पारदर्शिता की कमी
भारत में ज्यादातर लोग किसी दवा पर सिर्फ इसलिए भरोसा करते हैं क्योंकि डॉक्टर ने उसे लिखा है। वहीं कई डॉक्टर भी यह मान लेते हैं कि जिस बड़े ब्रांड का नाम दवा पर लिखा है, वही कंपनी उसे बनाती होगी।
लेकिन हकीकत अक्सर अलग होती है। एक ही मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अलग-अलग ब्रांडों के लिए, एक ही मशीनों पर, एक जैसी दवाइयाँ तैयार कर सकता है। फिर भी इन दवाइयों की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट या निर्माण संबंधी जानकारी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं होती।
ऐसे में लोग सिर्फ ब्रांड के नाम पर भरोसा करते हैं, जबकि उस भरोसे के पीछे पूरी जानकारी मौजूद नहीं होती।
ध्रुव और डॉ. शिवांगी के लिए ये सिर्फ समस्याएँ नहीं थीं। यही वे सवाल थे, जिनका जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते SayaCare की नींव रखी गई।

SayaCare अपनी दवाइयों की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित करता है?
ध्रुव और डॉ. शिवांगी ने जिन समस्याओं को करीब से देखा, SayaCare उसी का समाधान लेकर आया। आइए जानते हैं कैसे।
1. हर बैच की टेस्टिंग
SayaCare पर कोई भी दवा लिस्ट होने से पहले उसकी हर बैच की जांच NABL-प्रमाणित सरकारी लैब में कराई जाती है। सिर्फ कुछ सैंपल नहीं, बल्कि हर बैच की टेस्टिंग होती है। यानी जो दवा आपके पास पहुँचती है, उसकी गुणवत्ता पहले ही जांची और सत्यापित की जा चुकी होती है।
2. छोटी और सीधी सप्लाई चेन
SayaCare दवाइयाँ सीधे निर्माता (Manufacturer) से खरीदता है और उन्हें सीधे टेस्टिंग लैब भेजता है। इसके बाद ही वे ग्राहकों तक पहुँचती हैं।
बीच में कई स्तर के बिचौलिए नहीं होते। इससे नकली दवाइयों के आने की संभावना कम होती है और दवा की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
3. किफायती कीमत
SayaCare की शुरुआत ही उन लोगों को ध्यान में रखकर हुई थी, जिनके लिए दवा खरीदना भी आर्थिक चुनौती बन जाता है। यही सोच आज भी कंपनी की प्राथमिकता है।
इसी वजह से SayaCare दवाइयाँ जन औषधि जैसी किफायती कीमतों पर उपलब्ध कराने की कोशिश करता है। कई ब्रांडेड दवाइयाँ यहाँ 80% तक कम कीमत पर मिल सकती हैं, ताकि अच्छी गुणवत्ता वाली दवाइयाँ हर भारतीय की पहुँच में हों।
4. सही स्टोरेज की व्यवस्था
दवाइयों की गुणवत्ता सिर्फ बनाने या टेस्टिंग तक ही सीमित नहीं होती। उन्हें सही तापमान और नमी (Humidity) में स्टोर करना भी उतना ही ज़रूरी है।
इसीलिए SayaCare में सभी दवाइयाँ नियंत्रित तापमान और नमी वाले वातावरण में रखी जाती हैं, ताकि उनकी गुणवत्ता आपके घर तक पहुँचने तक बनी रहे।
5. पूरी पारदर्शिता
SayaCare पर उपलब्ध हर दवा के साथ उसकी क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट भी देखी जा सकती है।
यह रिपोर्ट सिर्फ औपचारिकता नहीं होती। इसमें यह पुष्टि की जाती है कि दवा में वही सक्रिय तत्व (Active Ingredients) मौजूद हैं जो लेबल पर लिखे गए हैं, वे सही मात्रा में हैं और बैच में कोई हानिकारक पदार्थ नहीं पाया गया है।
यानी आपको किसी के कहने पर भरोसा करने की ज़रूरत नहीं। पूरी जानकारी आपके सामने होती है।
6. सही विकल्प, वही दवा
SayaCare पर किसी दवा का विकल्प (Substitute) चुनने का मतलब अलग दवा लेना नहीं है।
इसका मतलब सिर्फ इतना है कि ब्रांड बदलता है, लेकिन दवा का Salt और Composition बिल्कुल वही रहता है।
SayaCare का Medicine Conversion Portal आपको किसी भी ब्रांडेड दवा का समान Composition वाला विकल्प खोजने में मदद करता है, जो अक्सर काफी कम कीमत पर उपलब्ध होता है।
वही दवा, वही असर, सिर्फ ब्रांड अलग और कीमत ईमानदार।
एक बड़ा सवाल
अब आपके मन में एक सवाल आ सकता है।
जब SayaCare भी अपनी सेवाओं का प्रचार करता है, तो यह दूसरे ब्रांड्स से अलग कैसे है?
यह सवाल बिल्कुल जायज़ है।
फर्क सिर्फ इतना है कि जहाँ कई कंपनियाँ अपने बजट का बड़ा हिस्सा मार्केटिंग पर खर्च करती हैं, वहीं SayaCare उसी प्राथमिकता के साथ दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर निवेश करता है। यहाँ मार्केटिंग का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाला जाता। इसलिए दवाइयाँ किफायती कीमत पर उपलब्ध रहती हैं।
क्योंकि SayaCare का उद्देश्य सिर्फ दवाइयाँ बेचना नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए भरोसेमंद और किफायती स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है।
आखिर में
धर्मशाला के उस गाँव के उस व्यक्ति को याद कीजिए, जो कई किलोमीटर चलकर मेडिकल स्टोर पहुँचा था, अपनी दिनभर की कमाई भी गंवाई थी, लेकिन फिर भी उसे दवा नहीं मिली।
SayaCare की शुरुआत उसी व्यक्ति के लिए हुई थी।
और आज भी यह उसी सोच के साथ काम करता है।
चाहे आप किसी बड़े शहर में रहते हों या किसी छोटे कस्बे या गाँव में, चाहे दवा अपने लिए खरीद रहे हों या अपने परिवार के लिए, आपको यह जानने का पूरा अधिकार है कि आप कौन-सी दवा ले रहे हैं।
आपको कभी भी गुणवत्ता और कीमत के बीच समझौता नहीं करना चाहिए।
अगली बार जब आपके पास डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन हो, तो उसे SayaCare पर अपलोड करें। हमारे प्रशिक्षित फार्मासिस्ट आपकी ब्रांडेड दवा के समान Salt और Composition वाली जेनेरिक दवा ढूँढ़ने में आपकी मदद करेंगे।
क्योंकि हर भारतीय चाहे वह शहर में रहता हो या किसी दूरदराज़ के गाँव में, यह जानने का हकदार है कि वह अपने शरीर में क्या ले रहा है। और उसे ऐसी दवा मिलनी चाहिए जो असरदार भी हो और अनावश्यक रूप से महंगी भी न हो।
भारत में स्वास्थ्य सेवा लंबे समय तक भरोसे के सहारे चलती रही है, लेकिन अब समय है कि उस भरोसे के साथ पारदर्शिता और गुणवत्ता भी जुड़ें।
SayaCare इसी बदलाव की शुरुआत कर रहा है, हर टेस्टेड बैच के साथ, हर मरीज के लिए, देश के हर कोने तक।
हर बैच के साथ क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट देने वाली पहली फ़ार्मेसी।
“Tested Hai Toh Bharosa Hai!”
Mahak Phartyal completed her bachelor’s in pharmacy from Veer Madho Singh Bhandari Uttarakhand Technical University. She previously worked as a Medical Writer at Meril Life Sciences, where she wrote numerous scientific abstracts for conferences such as India Live 2024 and the European Society of Cardiology (ESC). During her college years, she developed a keen research interest and published an article titled “Preliminary Phytochemical Screening, Physicochemical and Fluorescence Analysis of Nyctanthes arbor-tristis and Syzygium cumini Leaves.”









